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Bhagalpur Flood: गंगा के कटाव में 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर समाया, महादेवपुर घाट के पास फिर बढ़ी चिंता

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | भागलपुर में गंगा के तेज कटाव से करीब 30 साल पुराना दुर्गा मंदिर नदी में समा गया। शंकरपुर में कटाव थमने के बाद महादेवपुर घाट के पास फिर कटाव शुरू होने से ग्रामीणों में चिंता है।

भागलपुर, 4 सितंबर। भागलपुर के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। शंकरपुर में पिछले कई दिनों से जारी तेज कटाव की चपेट में आने से करीब तीन दशक पुराना दुर्गा मंदिर गंगा में समा गया। इसके बाद बजरंगबली मंदिर भी नदी की धारा में विलीन हो गया। मंदिरों के नदी में समा जाने से ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल है।

हालांकि शंकरपुर रेलवे बांध के जिस हिस्से के पास सबसे ज्यादा कटाव हो रहा था, वहां फिलहाल स्थिति कुछ नियंत्रित हुई है। कटाव की रफ्तार थमने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन उनकी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसकी वजह महादेवपुर घाट के आसपास बांध के दूसरे हिस्से में दोबारा कटाव शुरू होना है।

मंदिर के बाद अब बांध की सुरक्षा पर नजर

ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा लगातार किनारे की जमीन को अपने साथ काट रही है। शंकरपुर में कटाव के दौरान पहले दुर्गा मंदिर इसकी चपेट में आया और देखते ही देखते नदी में समा गया। इसके बाद बजरंगबली मंदिर भी सुरक्षित नहीं रह सका।

स्थानीय लोगों के लिए ये दोनों मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं थे, बल्कि लंबे समय से इलाके की पहचान का हिस्सा रहे थे। करीब 30 साल पुराने दुर्गा मंदिर के नदी में समाने से ग्रामीणों में भावनात्मक आक्रोश और चिंता दोनों देखने को मिल रही है।

अब लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कटाव यदि रेलवे बांध या उसके आसपास के संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

फ्लड फाइटिंग से एक जगह राहत, दूसरी जगह फिर कटाव

कटाव की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन की टीमें इलाके पर नजर बनाए हुए हैं। जिस स्थान पर कटाव तेज था, वहां बचाव कार्य यानी फ्लड फाइटिंग के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।

ग्रामीणों के मुताबिक इस हिस्से में विभाग की ओर से किए गए बचाव कार्य से कटाव की स्थिति में सुधार आया है। लोगों ने माना कि समय रहते फ्लड फाइटिंग शुरू किए जाने से फिलहाल बड़े नुकसान को टालने में मदद मिली है।

लेकिन अब महादेवपुर घाट के पास नए सिरे से कटाव दिखाई देने लगा है। ऐसे में स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस स्थान को भी संवेदनशील मानते हुए तत्काल बचाव कार्य शुरू करे।

गंगा बांध से कितनी दूर है?

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार महादेवपुर घाट और नदी में समाए दुर्गा मंदिर के बीच के हिस्से में बांध की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में बांध की चौड़ाई अपेक्षाकृत कम है और गंगा का पानी बांध से करीब 16 से 17 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक पानी के अंदर भी नदी की धारा लगातार जमीन को काट रही है। यही वजह है कि ऊपर से स्थिति सामान्य दिखाई देने के बावजूद अंदर ही अंदर कटाव जारी रहने का खतरा बना हुआ है।

यदि नदी की धारा इसी तरह जमीन काटती रही और कटाव बांध के करीब पहुंच गया तो आसपास के गांवों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीणों ने तत्काल बचाव कार्य की मांग की

महादेवपुर घाट के पास कटाव दोबारा शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वहां बिना देरी किए फ्लड फाइटिंग का काम शुरू कराया जाए।

स्थानीय लोगों का तर्क है कि कटाव को शुरुआती चरण में रोकना ज्यादा आसान होता है। अगर नदी की धारा बांध के बिल्कुल करीब पहुंच गई तो उस समय बचाव कार्य करना ज्यादा मुश्किल और महंगा हो सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सिर्फ उस स्थान पर ध्यान नहीं दिया जाए जहां कटाव पहले से गंभीर था, बल्कि आसपास के कमजोर हिस्सों की भी लगातार निगरानी की जाए।

प्रशासन और विभाग की टीम कर रही निगरानी

कटाव प्रभावित इलाके की स्थिति पर जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है। अधिकारियों की टीम मौके की स्थिति का जायजा ले रही है और संवेदनशील स्थानों पर बचाव कार्य को लेकर निगरानी की जा रही है।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गंगा की धारा लगातार अपना रुख बदल रही है। एक स्थान पर कटाव नियंत्रित होने के बाद दूसरे स्थान पर नदी का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सिर्फ एक जगह बचाव कार्य पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

ग्रामीण बोले- समय रहते कार्रवाई जरूरी

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर पहले फ्लड फाइटिंग का काम किया गया, वहां विभाग की कार्रवाई से स्थिति संभली है। लेकिन अब महादेवपुर घाट की तरफ जिस जगह कटाव दिखाई दे रहा है, वहां भी उसी तरह तत्काल काम किया जाना चाहिए।

लोगों का कहना है कि नदी के कटाव को लेकर प्रशासन की सक्रियता बनी रहनी चाहिए, क्योंकि शुरुआती स्तर पर किया गया बचाव कार्य ही संभावित बड़े नुकसान को रोक सकता है।

बाढ़ का खतरा भी बढ़ने की आशंका

गंगा के बढ़ते दबाव और किनारे की जमीन के कटने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका भी बनी हुई है। यदि कटाव बांध तक पहुंचता है और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बड़ी आबादी के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।

फिलहाल शंकरपुर में कटाव की स्थिति पहले की तुलना में नियंत्रित बताई जा रही है, लेकिन महादेवपुर घाट के पास नए सिरे से शुरू हुआ कटाव प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है।

ग्रामीणों की मांग साफ है—कटाव को गंभीर रूप लेने से पहले रोकने के लिए तत्काल और लगातार फ्लड फाइटिंग की जाए।

संपादकीय

गंगा के कटाव को सिर्फ नदी की समस्या समझना बड़ी भूल

भागलपुर में गंगा का कटाव एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि नदी किनारे रहने वाली आबादी की सुरक्षा के लिए हमारी तैयारी कितनी मजबूत है। एक पुराना मंदिर नदी में समा जाना सिर्फ एक धार्मिक स्थल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह उस तेजी का संकेत है जिस रफ्तार से नदी किनारे की जमीन कमजोर हो रही है।

शंकरपुर में कटाव नियंत्रित होने के बाद महादेवपुर घाट के पास नया कटाव शुरू होना बताता है कि नदी की धारा लगातार दबाव बना रही है। ऐसे में किसी एक स्थान पर बचाव कार्य पूरा कर देना पर्याप्त नहीं होगा। पूरे संवेदनशील इलाके की लगातार निगरानी और कमजोर हिस्सों की पहले से पहचान जरूरी है।

फ्लड फाइटिंग का काम उस समय शुरू होना चाहिए जब खतरा दिखाई देने लगे, न कि बांध के बिल्कुल किनारे तक पानी पहुंचने के बाद। प्रशासन, जल संसाधन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय इस चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रामीणों की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाए। स्थानीय लोग नदी और उसके बदलते व्यवहार को लंबे समय से देखते आए हैं। उनकी सूचना को प्रशासनिक निगरानी के साथ जोड़कर समय रहते कार्रवाई की जाए तो बड़े नुकसान की संभावना कम की जा सकती है।

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